Sunday, August 16, 2020

सतरंगी मेरा देश

जहाँ है अनेकता में एकता,

जहाँ है खाने में विशिष्टता,

जहाँ है परिधान में विभिन्नता।

जहाँ गौ, धरती, नदियाँ हैं माता,

जहाँ ग्रहों को भी देव है माना,

सभी धर्मों का आदर करना..

ये सिखाया हमें है जाता।

यहाँ पढ़े जाएं गीता, पुराण,

गूंजे यहाँ मस्जिदों की अज़ान,

यीशु मसीह और वाहे गुरु का..

बसा सबकी साँसों में नाम।

देश हमारा जैसे इंद्रधनुष,

सातों रंग की अपनी खूबी,

न कोई कम, न है कोई ज़्यादा,

रहे हमारा भारत संपन्न और समृद्ध सदा।

-प्रा..ध🌱

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सतरंगी मेरा देश

जहाँ है अनेकता में एकता, जहाँ है खाने में विशिष्टता, जहाँ है परिधान में विभिन्नता। — जहाँ गौ, धरती, नदियाँ हैं माता, जहाँ ग्रहों को भी देव ह...